العالمية

म्यांमार के इस बौद्ध भिक्षु ने महामारी के दौरान जब लोगों को ढेर सारा प्‍लास्टिक निकालते देखा तो…

यांगून: महामारी का समय कई तरह की चुनौतियां लेकर आया, ऐसी ही एक चुनौती कचरे के निपटान की भी थी. म्‍यांमार में भी ऐसा ही कुछ हुआ. वहां महामारी के दौरान जब एक प्रमुख बौद्ध भिक्षु ने यांगून (Yangon) में अपने पड़ोसियों को ढेर सारा प्लास्टिक कचरा (plastic waste) निकालते देखा, तो उन्‍होंने इस बारे में कुछ करने का फैसला किया. 

Thabarwa meditation centre चलाने वाले एबॉट ओटामासरा (51) ने इन प्‍लास्टिक कंटेनरों का उपयोग जरूरतमंदों को भोजन बांटने के लिए कटोरों के विकल्‍प के तौर पर करने की सोची. उनके इस आग्रह को सुनकर लोग अचंभे में पड़ गए, लेकिन बाद में उनका प्रयास जबरदस्‍त रंग लाया. 

ये भी पढ़ें: कोरोना: बेहद बुरी खबर, वैक्‍सीन की रेस में सबसे आगे चल रहे रिसर्चरों ने इसलिए रोक दिया काम

अब उनकी टीम हर दिन दर्जनों स्वयंसेवकों की मदद से इस्‍तेमाल की जा चुकीं हजारों प्‍लास्टिक की बोतलें प्राप्‍त करती है, जिन्‍हें वह रीसाइकल करके खाने के कंटेनर या ध्यान केंद्र में उपयोग होने वाली सामग्री में बदल लेते हैं. 

उन्‍होंने बताया, ‘महामारी के दौरान जब मैं जरूरतमंदों के लिए भोजन उपलब्‍ध कराने दान लेने निकलता था तो मैंने देखा कि सड़क पर ढेर सारा प्लास्टिक कचरा डंप किया जा रहा था.’ 

चूंकि म्‍यांमार के अधिकारी नियमित रूप से कचरे की रीसाइक्लिंग नहीं करते हैं, लिहाजा यांगून में हर दिन करीब 2,500 टन कचरा हर रोज बाहर फेंका जाता है. इसे या तो सड़कों में फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है.

ओटामासरा ने कहा, ‘लिहाजा हमने इन प्‍लास्टिक बोतलों को रीसाइकल कर खाद्य कंटेनर के रूप में उपयोग करने का सोचा. इससे न केवल पैसे बचते हैं, बल्कि प्लास्टिक कचरे का निपटान भी होता है.’ 

उन्‍होंने अनुमान लगाया कि वे अब तक 2 लाख प्‍लास्टिक बोतलों या 2 टन कचरे को रीसाइकल कर चुके हैं, जिससे करीब 10 हजार डॉलर की बचत होती है.

9 एकड़ (3.6 हेक्टेयर) में बना ध्यान केंद्र प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करने के लिए वर्कशॉप आयोजित करता है.

वॉलेंटियर्स सनशेड्स (sunshades) बनाने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग करते हैं. यहां तक कि उन्‍होंने शेल्‍टर की दीवारों के निर्माण में भी प्लास्टिक कचरे से भरे टायर और सीमेंट का इस्‍तेमाल किया है. 

مقالات ذات صلة

إغلاق